महाविद्यालय भवन

वनस्पति वाटिका, अशोक वृक्ष, कचनार, सायकस, गुलमोहर, अमलतास आदि छोटे-बड़े पौधें लताओं को दाएँ-बाएँ अपनी बाहों में समेटे मुख्यद्वार को झाँकता हुआ महाविद्यालय का भवय भवन तीन तल का सुव्यवस्थित है। जमीन तल पर दक्षिणी ओर क्रमशः रसायनशास्त्रा, वनस्पतिशास्त्रा, जन्तु विज्ञान एवं भौतिक शास्त्रा के समर्थ प्रयोगशालाएँ हैं तो इसी के सम्मुख दूसरी ओर मनोविज्ञान एवं भूगोल प्रयोगशालाओं के साथ हीं विज्ञान संकाय के विभागीय कक्षों की व्यवस्था है। दूसरे तल पर मुख्य रूप से व्याख्यान- कार्य सम्पादन किया जाता है। बड़े हाॅल एवं कई छोटे-बड़े कमरों में विभिन्न वर्गों का अध्यापन एक साथ किया जाता है।
छात्रा-छात्राओं एवं शिक्षकोपयोगी समृ( पुस्तकालय-समान्य पुस्तकालय एवं बुक बैंक-इसी तल पर व्यवस्थित है।
तीसरे तल पर पीछे-नव निर्मित दो मंजिले भवन के ध्रती तल पर छात्रा काॅमन रूम, कुलानुशासक कार्यालय, क्रमीड़ा परिषद् तथा वर्ग संचालन हेतु हाॅल है। उपरी तल पर मुख्य रूप से वर्गों का संचालन होता है। कला संकाय के विभागों की व्यवस्ािा ‘लोरिक भवन’ के अन्तर्गत है।
विशाल ब्रह्मवृक्ष की शीतल छाया में प्रशासनिक भवन, छात्रा-काॅमन रूम, परीक्षा विभाग, लेखा विभाग और इन सबों के बीचो-बीच प्राचार्य कक्ष भगवान बु( की तपोभूमि बोध्गया की स्मृति को तरोताजा कर देता है।